- नरौरा न्यूक्लियर प्लांट से नजदी· है सीमा
- गंगा के माध्यम से पैदा हो सकते हैं न्यूक्लियर रेडीएशन के हालात
- भूकम्प को लेकर संवेदनशील इलाके में शामिल है नरौरा प्लांट
- जनपद में लोगों को नहीं है हालातों की जानकारी
- प्रशासन के द्वारा भी जागरुता नहीं
- परमाणु व प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के इंतजाम जरुरी
काशीरामनगर जनपद प्राकृतिक आपदाओं वाला क्षेत्र काफी पहले से ही रहा है। जनपद का ५१ कीलोमीटर लम्बा भूभाग गंगा के मुहाने से जुड़ा है। नरौरा गंगा बांध से यहां केवल गंगा का ही संपर्क नहीं बल्कि यहां से निकाली गई नहर भी जनपद की सीमाओं से होकर गुजरती है। वर्षों से बाढ़ की आपदा झेल रहे इस इलाके में बाढ़ आपदा से निपटने के इंतजाम आज तक नहीं हो सके हैं। अब जबकी परमाणु खतरा भी महसूस किया जा रहा है और जनपद इस खतरे के मुहाने पर है, जानकार लोग इस खतरे से निपटने के लिए यहां के लोगों को प्रशिक्षित करने की बात भी करते हैं और परमाणु आपदा से निपटने के लिए इंतजाम की जरुरत महसूस करते हैं।
नरौरा परमाणु केंद्र कोई नया नहीं, भारत सरकार के द्वारा तमाम सुरक्षा प्रबंधों के बाद इस संयंत्र की स्थापना की गई है। भूकंपरोधी व अन्य तरह की सुरक्षा के उपाय यहां किये गए हैं। लेकिन अभी किसी बड़े भकंप की स्थिति का यहां सामना नहीं हो सका है, केवल उत्तरकाशी का भूकंप ही एक बड़े भूकंप के रुप में पिछले समय में निकला था। भूकंप के लगातार झटके आने के बाद और जापान में सुनामी और भूकंप के झटको की स्थिति को देखते हुए भारतीय भूगर्भ वैज्ञानिक भी चिंतित हुए हैं। उन्होने भूकंप के लिए जोन-४ को संवेदनशील माना है और इस जोन में नरौरा परमाणु संयंत्र भी आता है। जानकारों की बात पर भरोसा करैं तो इस इलाके में भूकंप की स्थिति भी गंगा के जल को रेडिएशन से प्रदूषित कर सकती है। क्योकि यहां भूगर्भ जलस्तर भी चार से पांच मीटर पर ही है। भूकंप का कोई झटका यहां के भूमिगत जल को रेडियोएक्टिव कर सकता है। क्योंकि यहाँ की मिट्टी बलुई और रेतीली है। पथरीली चट्टानें यहां नहीं हैं।
यदि भविष्य में कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो उसके दुष्परिणामों से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योकि सबसे अहम बात यह है की काशीरामनगर में सामान्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में परमाणु खतरे से निपट पाने की बात बेगानी है। क्षेत्र के लोग परमाणु संयंत्र के खतरे से ही आगाह नहीं हैं तो उनसे बचाव रखने की क्या उम्मीद की जा सकती है। जनपद में लोगों को बचाव के उपाय और खतरों से आगाह करना जरुरी है। यदि इस दिशा में समय रहते काम नहीं किया गया तो विकराल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शिवमंगल सिंह ने बताया की कोई रेडिएशन होने की स्थिति में गंगा के पानी में निश्चित रेडिएशन होगा। इस संबंध में उपाय करना भी अत्यंत आवश्यक है।
- अजय झंवर।

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