Wednesday, August 18, 2010

पटियाली में भी कम नहीं थे आजादी के दीवाने

पटियाली। १९४२ में गांधी जी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में कसबा और देहात के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। स्वतंत्रता की लड़ाई का बिगुल कटरी क्षेत्र के ग्राम बड़ौला से बजा जिसकी गूंज पर कसबा के लोगों ने भी हिस्सा लिया। १९४१ में ग्राम बड़ौला निवासी ठाकुर चितर सिंह के तीन पुत्र भूप सिंह, पंजाब सिंह और आलम सिंह ने अगवाई कर ग्रामीणों के सहयोग से अंग्रेजों की फौज से जमकर मुकाबला लिया और हिंसक झड़पों के बाद रामू नाम के उस निर्दोष व्यक्ति को गोरे अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ा लिया, जिसे अंग्रेज बीच गांव नंगा कर पीटने के बाद गिरफ्तार कर अपने साथ ले जा रहे थे।
तीतर नामक अंग्रेज सिपाही का इस मारपीट में हाथ टूटने के अलावा सिर भी फूट गया था। तीनों भाई घर से इस घटना के बाद भागकर गांधी जी द्वारा चलाए जा रहे सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हो गए। जहां इन्होंने नरथर रेलवे स्टेशन पर रेलवे लाइन को उखाड़ फेंका था। आजादी के तीनों दीवानों को अग्रेंजों ने गिरफ्तार कर एटा जेल में डाल दिया था। तीनों भाइयों के जेल जाने के गम में उनके माता-पिता ने प्राण त्याग दिए थे। १८ दिसंबर १९४२ को गिरफ्तार किए गए तीनों भाई दो वर्ष बाद १८ दिसंबर १९४४ को रिहा किए गए। इसी तरह १९४२ के आंदोलन में कसबा के मोहल्ला बिरतियाना निवासी कुंदनलाल पांडेय के दो पुत्र राजाराम पांडेय और ग्याप्रसाद पांडेय ने भी बढ़ चढ़कर स्वतंत्रता के आंदोलन में हिस्सा लिया। अंग्रेज सिपाही रोस्ठेलर को थप्पड़ मारने और आजादी के आंदोलन के तहत पटियाली का बाजार बंद कराने के आरोप में दोनों भाइयों को धारा ३३२, १४७ के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जहां से तीन वर्ष बाद १९४५ को दोनों भाई रिहा हो सके। इस दौरान दोनों भाइयों को गंभीर यातनाएं दी गईं। इन्हें काल कोठरी तक में रखा गया।

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