Wednesday, August 18, 2010

आजादी के लिए महिलाओं ने दिखाए जौहर

कासगंज। स्वतंत्रता आंदोलन में जनपद की महिलाओं ने महत्वपूर्ण योगदान देकर अपने सच्चे राष्ट्रप्रेम का परिचय दिया। महिलाओं ने विदेशी कपड़ों एवं शराब की दुकानों पर धरने दिए। प्रभात फेरियां निकाली, अमन सभाएं भंग की। सन १९३०, ३२, ४१ और १९४२ के आंदोलनों में इन महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। स्वतंत्रता संग्राम में जनपद की महिलाओं ने अद्भुत शौर्य, साहस एवं उत्साह का परिचय दिया जो जनपद के लिए गौरव का विषय है। 
इन महिलाओं में मोहनपुर गांव की गंगादेवी पाराशर धर्मपत्नी गोपाल दत्त पाराशर सबसे प्रमुख थी, जिन्हें आंदोलनों में सक्रिय होने के कारण छह बार गिरफ्तार किया गया और छोड़ दिया गया। १९३२ के स्वतंत्रता संग्राम में इन्हें छह माह की जेल तथा १५ रुपये जुर्माने भरने की सजा मिली। १९४१ में छह माह की जेल और २० रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। देश की आजादी के लिए इन्होंने तीन बार जेल की सजा काटी। इन्होंने जिला कांग्रेस कमेटी तथा भारत सेवक समाज की महिला संयोजिका के रुप में उल्लेखनीय कार्य किया। इसी गांव की गंगादेवी पत्नी पुरुषोत्तम ने १९३२ के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण छह माह की जेल तथा १० रुपये का दंड भोगा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानपाल गुप्त की पत्नी मायादेवी कासगंज ने १९३२ में १० रुपये जुर्माने का दंड भोगा। इसी वर्ष वे एक बार फिर से गिरफ्तार की गई। इस बार तीन माह की जेल तथा २५ रुपए का दंड भरना पड़ा। १९३२ में इन्हें दो बार जेल जाना पड़ा। कासगंज की शिवरानी पत्नी निरंकार प्रसाद को नमक सत्याग्रह में भाग लेने के कारण तीन माह की जेल और २५ रुपये जुर्माना भी हुआ। सोरों निवासी नरेन्द्र देवी पत्नी परमानंद को १९३० में तीन माह की सजा हुई। वहीं प्रेमवती गुप्ता पुत्री मथुरा प्रसाद गुप्ता निवासी सोरों गेट कासगंज को प्रथम बार १९३० में छह मास की जेल और ५० रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। दूसरी बार डेढ़ वर्ष की सजा हुई, लेकिन गांधी-इरविन समझौते के कारण वे जेल जीवन से मुक्ति मिल गई। इन महिलाओं के अतिरिक्त अनेक ऐसी महिलाएं भी हैं, जिन्हे गिरफ्तार किया गया, किंतु बिना दंड के ही छोड़ दिया गया। उन महिलाओं का त्याग भी अविस्मरणीय रहेगा जिनके पति, पुत्र या भाई स्वतंत्रता आंदोलन में जेल गए।

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