Wednesday, August 18, 2010

अचलताल से जुड़ी हैं गांधी, नेहरू की यादें


Story Update : Saturday, August 14, 2010    12:02 AM
कासगंज। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यहां के क्रांतिकारियों के जोश और जज्बे को देखकर स्वतंत्रता संग्राम के नायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पंडित जवाहर लाल नेहरू कासगंज आए थे। उन्होंने क्रांतिकारियों के बीच जोश का संचार किया। नेताओं के आगमन के दौरान क्षेत्र की महिलाओं ने अपने आभूषण तक उतारकर इन महापुरुषों का अभिनंदन किया।
असहयोग आंदोलन के समय में आजादी की ज्वाला तेजी से धधक रही थी। इसी दौरान १९२१ सितंबर माह में पंडित जवाहरलाल नेहरू का कासगंज आगमन हुआ था। पंडित नेहरू ने यहां के अचल ताल में एक सभा भी की थी। इस सभा में क्रांति के जोश का संचार हुआ था। इसके बाद वर्ष १९२९ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आगमन हुआ। राष्ट्रपिता के आगमन की सूचना क्षेत्र के लोगों को हुई तो बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शनों को उमड़ पड़े। उन्होंने यहां की गंगा चुंगी धर्मशाला और अचल ताल पर जनसभाओं को संबोधित किया और आगामी स्वतंत्रता संग्राम के लिए तैयार रहने का संकेत दिया था। यहां के स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास बताता है कि इन सभाओं में स्त्रियों ने अपने आभूषण तक उतारकर इन महापुरुषों का अभिनंदन किया। ग्राम पिवारी के ठाकुर माधौ सिंह ने इनका अभिनंदन किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कासगंज की बसावट ठीक चौसर की तरह थी, जो आज भी है। यहां जो पहले अचल ताल था, अब उसका नाम प्रभूपार्क है। १९४७ में आजादी के समय शहर का स्वरूप सीमित था, लेकिन अब कई किलोमीटर में इसका दायरा फैल चुका है।

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