Monday, July 11, 2011

hadse ke nishan

e bhai jara dekh k chalo

Friday, July 8, 2011

भीषण भिड़ंत के बाद लहराती रहीं बोगियां


अड़ूपुरा (कांशीरामनगर)। रेल हादसे के प्रत्यक्ष गवाह छपरा के यात्री थे। खूनी मंजर देख उनमें इस कदर खौफ व्याप्त था कि हर कोई ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रहा था। रात के सन्नाटे में ट्रेन की भीषण भिड़ंत की आवाज सुनकर लोग जग गए। उनका कहना था कि ट्रेन की बोगियां करीब आधा किमी से अधिक दूर तक लहराती रही थीं। जब गाड़ी रुकी तब उनकी जान में जान आई।
दुर्घटना में हैरतअंगेज बात तो यह थी कि जब ट्रेन चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लिए तो पॉवर ब्रेक का पाइप जोड़ों से टूट गया। ऐसे में क्षतिग्रस्त बस का गार्डर इंजन के पहिए में फंस गया, जिसके सहारे धीरे-धीरे ट्रेन रुक गई। इंजन की पीछे की बोगी संख्या 90785 में यात्रा कर रहे यात्री इरशाद खान ने बताया कि जिस समय दुर्घटना घटी, वह पानी पीने के लिए उठा था कि भीषण आवाज हुई और गाड़ी लहराने लगी। धुएं का गुबार उठा। उन्हें लगा कि अब जान नहीं बचेगी। वहीं ट्रेन में मथुरा से सवार हुए सुभाष और अरविंद ने बताया कि वह दोनों लोग आपस में बात कर रहे थे कि उसी दौरान हादसा हुआ। यात्री वसीम अहमद ने बताया कि बस दुर्घटना के बाद बस के गार्डर और बस का मलबा इंजन के पहियों में फंस गया जो घिसटता हुआ इंजन के साथ आगे बढ़ रहा था। बे्रक पाइप के टूट जाने पर गार्डर की वजह से ट्रेन आगे जाकर रुक पाई। यह सब भगवान का शुक्र था, अन्यथा ट्रेन भी पलट सकती थी।

kasganj kanshiramnagar train accident on 7july 2011







असुरक्षित है कासगंज-कानपुर रेलमार्ग

कासगंज। मथुरा-कानपुर रेल मार्ग असुरक्षित है। मानव रहित क्रासिंग पर लगातार हादसे हो रहे हैं। इसके बावजूद रेल प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। हादसों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
मथुरा-कानपुर रेल मार्ग पर यह पहला हादसा नहीं है। मथुरा-कानपुर रेल मार्ग के आमान परिवर्तन के बाद यहां गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ी हैं। इसमें मालगाड़ियों का आवागमन इस मार्ग से होता है। कुल ५६ अनमैंड रेलवे क्रॉसिंग हैं, जिनमें से १६ मैंड रेलवे क्रॉसिंग ही हैं। इसके अलावा मथुरा की ओर भी विभिन्न इलाकों में कई अनमैंड रेलवे क्रॉसिंग पर हादसे हुए हैं। सबसे बड़ा हादसा कासगंज-सहावर मार्ग पर चांडी रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ था। जहां दबंगई के बल पर रेल फाटक खुलवाकर बस निकालने की कोशिश में बस-ट्रेन की भिड़ंत हुई थी और ४८ मौत हुई थी। यह हादसा जिले का अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा है।
अनमैंड क्रॉसिंग पर अब तक हुए हादसे
- चांडी रेलवे क्रॉसिंग पर हादसे में ४८ की मौत
- दिहारी मेहारी रेलवे क्रॉसिंग के हादसे में नौ मरे
- कासगंज और सहावर के बीच हादसे में दो मरे
- कासगंज-बरेली टै्रक पर ट्रेन-जुगाड़ की भिड़ंत, दो मरे
- कासगंज-सहावर के बीच ट्रेन की टक्कर से ट्रैक्टर कटा
- कासगंज-फर्रुखाबाद एक्सप्रेस बस से टकराई, बाल-बाल बचे

रेलवे के संरक्षा आयुक्त ने किया घटनास्थल का दौरा

कासगंज। अड़ूपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर हुई रेल दुर्घटना की जांच रेलवे के संरक्षा आयुक्त नगर विमानन मंत्रालय के प्रभात कुमार वाजपेयी ने शुरू कर दी है। संरक्षा आयुक्त ने दुर्घटनास्थल का दौरा कर हालातों का जायजा लिया। वहीं दुर्घटना के संबंध में एटा चिकित्सालय पहुंचकर घायलों से बातचीत की। शनिवार को भी संरक्षा आयुक्त जांच करेंगे।
रेल दुर्घटना की जांच के निर्देश रेल मंत्रालय के द्वारा दुर्घटना के बाद से ही जारी कर दिए गए थे और इसका जिम्मा श्री वाजपेयी को सौंपा गया है। दुर्घटना के बाद शाम को ही श्री वाजपेयी ने घटनास्थल का दौरा कर लिया था। कासगंज के रेलवे अधिकारी विश्रामालय में जांच कार्य में लगे कर्मियों का शिविर शुक्रवार को शुरू हो गया जहां जांच कार्य की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के लिए श्री वाजपेयी ने एटा पहुंचकर घायलों से बातचीत कर बयान दर्ज कराए। रेल संचालन से जुड़े अधिकारी व कर्मियों के बयान भी जांच टीम के द्वारा दर्ज किए गए। इसके अलावा ट्रेन के चालक व गार्ड के बयान भी लिए गए। जांच का काम आज शनिवार को भी जारी रहेगा। इस दुर्घटना को लेकर जांच पड़ताल के परिणाम से यह भी स्पष्ट होगा कि यह दुर्घटना महज लापरवाही के चलते हुई है या फिर किसी तरह की रंज इसके पीछे है। इज्जतनगर रेल मंडल के पीआरओ राजेन्द्र सिंह ने बताया कि जांच प्रक्रिया आज शनिवार को और चलेगी और घटना के संबंध में अपने बयान दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा रेल संरक्षा पूर्वोत्तर परिमंडल हजरतगंज लखनऊ को घटना के संबंध में लिखकर दिया जा सकता है।

बस का चालक सोया था छत पर






कासगंज। कहते हैं कि मौत किसी न किसी बहाने से और किसी न किसी को बहाना बनाकर अपनी ओर खींच ही लाती है। ऐसा ही परिणाम बारातियों की बस का रहा। न बस का मुख्य चालक रात में वापस जाने को तैयार था और न ही वधू पक्ष के लोग, लेकिन बारातियों की मौत उन्हें खींच रही थी जो जाने की जिद पर अड़े थे।
बारातियों की बस को चला रहा सह चालक और परिचालक मुन्ना ठाकुर बस के बंद होते ही बस को स्टार्ट करने के प्रयास में जुटा। जब बस स्टार्ट नहीं हुई तो उसने बारातियों से बस में धक्का लगाने को भी कहा। लेकिन कोई भी राजी नहीं हुआ। यहां तक कि उल्टे मुन्ना से बारातियों ने गाली गलौज कर दी। इसी जद्दोजहद में छपरा एक्सप्रेस आ गई और बड़ी दुर्घटना घट गई। वीभत्स दुर्घटना के बाद ऐसे तमाम चर्चाएं उबर कर सामने आईं। वहीं पटियाली पुलिस ने रेलवे द्वारा दुर्घटना की प्राथमिकी दर्ज करा देने के बाद जांच पड़ताल शुरू की है। बस का मुख्य चालक पेशकार पुत्र रामसिंह गांव बिलारपुर थाना अलीगंज था जो बारातियों से झगड़े के बाद बस की छत पर जाकर सो गया था। जिस समय दुर्घटना घटी वह बस की छत पर सो रहा था और टक्कर में दूर छिटककर गिरा और घायल हो गया। पुलिस जांच पड़ताल में ड्राइवर के नाम की शिनाख्त हुई है, लेकिन अभी ड्राइवर पुलिस को नहीं मिला है। पटियाली पुलिस के पुलिस क्षेत्राधिकारी पंकज पांडे ने बताया कि पुलिस की जांच पड़ताल चल रही है।

टे्रन के इंजन पर लटके थे कई शव






अड़ूपुरा (कांशीरामनगर)। हर तरफ चीत्कार, लोगों की भारी भरकम भीड़, महिलाओं की चीखपुकार, रेल इंजन पर लटके लोगों के शव। यह वीभत्स नजारा ट्रेन एक्सीडेंट की हकीकत बयां कर रहा था। रेल इंजन के आगे बस के परखच्चे देख लोग बुरी तरह दहल गए। जिस किसी ने भी मथुरा-कानपुर रेलमार्ग पर पटियाली क्षेत्र के अड़ूपुरा क्रासिंग पर यह ट्रेन हादसा देखा उसकी रूह कांप गई।
अड़ूपुर के मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर रात्रि करीब दो बजे खड़ी बस को तेज गति से जा रही छपरा सुपरफास्ट एक्सप्रेस ने भीषण टक्कर मारी तो बस के परखच्चे उड़ गए। कुछ ही पलों में बस में मौजूद सवारियों के शव नजर आ रहे थे। जो जहां था वहां से हिल भी न सका। बस के आगे बैठे लोगों के शव ट्रेन के इंजन में जाकर बुरी तरह फंस गए। कुछ शव इतने वीभत्स रुप में थे कि केवल मांस के लोथड़े ही नजर आ रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता और रेलवे की रिलीफ ट्रेन पहुंचने के बाद अंधेरे में एकसाथ कई टार्चाें की रोशनी में शवों को झाड़ियों, गड्ढों से तलाशा गया। सुबह करीब साढ़े चार बजे अंधेरे को चीरकर सूरज की लालिमा का असर दिखाई दिया तो जहां-तहां पड़े लोगों के शव दिखाई दिए। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे, पुलिस अधीक्षक रतन कुमार श्रीवास्तव करीब साढ़े तीन बजे ही घटनास्थल पर पहुंच गए थे। उन्हाेंने राहत कार्य तेजी से शुरू करवाया। इससे पूर्व एएसपी दद्दनपाल, सीओ पंकज पांडे, पटियाली के इंस्पेक्टर घायलों को चिकित्सालय भेज चुके थे। पुलिस ने शवों को तलाश पोस्टमार्टम के लिए एटा भेजा। कुल 33 शव घटनास्थल पर मिले। जबकि अन्य घायलों ने चिकित्सालय में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटनास्थल का मंजर हादसे की वीभत्सता की गवाही दे रहे थे। कहीं बस के परखच्चे बिखरे पड़े थे कहीं बारातियों का सामान पड़ा था।

‘कितना बदल गया इंसान...’


अड़ूपुरा (कांशीरामनगर)। ‘देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान...’। इस गीत के बोल मौजूदा परिवेश में सटीक बैठते हैं। मथुरा-कानपुर रेलमार्ग के अड़ूपुर क्रॉसिंग पर हुए रेल हादसे में ३८ जानें चली गईं, ३२ घायल हो गए। इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बाद लोगों के हाथ मदद के लिए नहीं उठे, बल्कि मृतकों की जेबों को साफ किया गया।
अड़ूपुर का मंजर इतना वीभत्स था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए लेकिन यहां लोग मृतकों और घायलों की मदद के बजाए बचते रहे। पुलिस और रेलकर्मी शवों की खोजबीज में जुटे थे। उस दौरान जब पुलिस लोगों से सहयोग की बात करते तो हर कोई किनारा कर लेता। ऐसी स्थिति को देख मानवता शर्मसार हो रही थी। सिर्फ वही लोग मदद को आगे आ रहे थे जिनके रिश्तेदार, परिचित हादसे का शिकार हुए। एसपी रतन कुमार श्रीवास्तव, एएसपी पंकज पांडे ने खुद मृतकों को उठाने की पहल की तब कहीं जाकर लोग आगे बढ़े और शवों को उठाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में मदद की। वहीं इस हादसे में ज्यादातर मृत लोगों के मोबाइल गायब थे। उनकी जेबें भी साफ थीं। कुछ घायल लोगों ने बताया कि जब तक पुलिस और अन्य राहत टीम पहुंचती। कुछ लोगों ने मृतकों, घायलों की जेब से नकदी, सामान तथा मोबाइल उड़ा लिए। सवाल है कि आखिर क्या हो गया इंसानी रिश्तों को? हालात इंसानी मूल्यों में गिरावट की गवाही दे रहे थे और इस सच पर सोचने को मजबूर कर रहे थे कि आदमी का मूल्य उसकी सांसों तक टिकी है। सांस थमते ही आदमी ही आदमी से कतराता क्यों है।
रंज या लापरवाही, जांच में खुलेंगी परत

अड़ूपुरा (कांशीरामनगर)। भीषण ट्रेन हादसे के दौरान लापरवाही किसकी थी इसकी परत जांच के बाद ही सामने आएगी। ट्रेन हादसे की जांच नगर विमानन मंत्रालय के अधिकारी और पूर्वोत्तर परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त प्रभात वाजपेयी को सौंपी गई है।
जांच का यह कार्य शुक्रवार (आज) और शनिवार तक चलेगा। श्री वाजपेयी रेलवे के विश्रामालय गृह पर सुबह १०.३० बजे जांच शुरू करेंगे। यह दुर्घटना बस चालक-परिचालक और बारातियों के बीच मारपीट को लेकर हुई रंज के चलते हुई या फिर लापरवाही दुर्घटना का कारण बनी, इसकी परतें भी जांच में ही खुलेंगी। दुर्घटना स्थल पर घायलों ने रेलवे और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को बताया कि बारात से लौट रहे बाराती रात में ही ड्राइवर से बस ले चलने की कह रहे थे। बस चालक ने बस को सुबह ले जाने को कहा। इस पर बारातियों और चालक के बीच मारपीट भी हुई। बारातियों ने परिचालक से भी मारपीट की। इसके बाद चालक-परिचालक बस को ले जाने पर तैयार हो गए। बाद में रेल क्रॉसिंग पर बस बंद हुई और हादसा हो गया। प्रशासन का मानना है कि जिस व्यक्ति की अभी तक शिनाख्त नहीं हुई है, वही बस परिचालक है। उसकी जेब से डीजल की पर्ची बरामद हुई है। फिलहाल जांच के बाद ही हकीकत का पता चलेगा।
इंजन से काट कर निकाल गए गाटर
कासगंज। रेल हादसे में बस के गाटर, रेल के इंजन के पहियों में बुरी तरह फंस गए। रेल कर्मियों ने गाटरों को निकालने का काफी प्रयास किया। जब सफल नहीं हुए तो बैल्डिंग से काटकर निकाला।

अज्ञात बस चालक के विरुद्ध मुकदमा
कासगंज। अड़ुपुर हादसे में रेलवे विभाग ने पटियाली कोतवाली में अज्ञात बस चालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है। रेलवे के संरक्षा आयुक्त रेल पथ एनएल मीणा ने कोतवाली में तहरीर दी। चालक पर बस को रेल पथ पर खड़ा करने का आरोप लगाया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इसकी जांच पटियाली पुलिस करेगी।

Thursday, July 7, 2011

हादसे की जानकारी पर दौड़े परिजन


कासगंज। अड़ुपुरा में बांके लाल के यहां बेटी सुधा की बारात प्रदीप पुत्र भगवान सिंह की यादव गढ़ी खगारपुर मिरहची एटा से आई थी। खुशियों का माहौल था। भोजन करने के बाद अधिकांश बाराती रात में ही बस से घर जा रहे थे। जैसे ही रेल हादसे की जानकारी परिजनों को मिली, लोग स्तब्ध रह गए। वैवाहिक कार्यक्रमों की रस्मों को छोड़कर लोग घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। वैवाहिक पंडाल में सन्नाटा पसर गया।

पालिकाध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि
कासगंज। पालिकाध्यक्ष राजेंद्र बौहरे रेल हादसे के बाद अड़ुपुर पहुंचे। उन्होंने शोक सभा कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। शोक सभा में बड़ी संख्या में पालिका कर्मी भी शामिल हुए।

बरेली फास्ट पैसेंजर-रुहेलखंड से टकराने से बची


कासगंज। बड़े ट्रेन हादसों के बावजूद रेल प्रशासन की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। कासगंज में रविवार रात्रि कासगंज से बरेली जाने वाली फास्ट पैसेंजर दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गई। ड्राइवर की सतर्कता से हादसा टल गया। वरना यह ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रुहेलखंड एक्सप्रेस से जा भिड़ती। हादसे का कारण सीजर का ऑन न हो पाना बताया जा रहा है। अभी तक रेल प्रशासन इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया है।
उल्लेखनीय है कि कासगंज प्लेटफार्म से रात्रि करीब सवा नौ बजे बरेली जाने के लिए फास्ट पैसेंजर रवाना हुई। ट्रेन बरेली के चालक रमेश चंद्र लेकर जा रहे थे। प्लेटफार्म से ट्रेन बरेली की ओर रवाना हुई। प्लेटफार्म से निकलने के बाद ट्रेन बरेली के रूट पर कैंची ऑन होने के बाद आगे बढ़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रेन सीधे दो नंबर प्लेटफार्म पर खड़ी रुहेलखंड एक्सप्रेस की ओर बढ़ती जा रही थी। ट्रेन चालक रमेश चंद्र की नजर पड़ी और उन्होंने तत्काल ही इमरजेंसी ब्रेक लगा कर गाड़ी को रोका। गनीमत थी कि गाड़ी की गति काफी कम थी। ट्रेन चालक ने इस मामले की जानकारी तत्काल स्टेशन अधीक्षक को दी। ट्रेन वापस करके सीजर ऑन किया गया। ट्रेन को बरेली के लिए रवाना किया गया। इसको लेकर कासगंज का रेल प्रशासन पूरी तरह से हक्का-बक्का रह गया। उन्हें इस लापरवाही का जवाब भी नहीं सूझ रहा था। कासगंज के स्टेशन अधीक्षक देशराज सिंह ने बताया कि सीजर लाइट डिम होने के कारण चालक की नजर इस पर नहीं पड़ सकी, जिसके चलते ट्रेन रुहेलखंड के ट्रैक पर चली गई। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।