Friday, July 8, 2011

‘कितना बदल गया इंसान...’


अड़ूपुरा (कांशीरामनगर)। ‘देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान...’। इस गीत के बोल मौजूदा परिवेश में सटीक बैठते हैं। मथुरा-कानपुर रेलमार्ग के अड़ूपुर क्रॉसिंग पर हुए रेल हादसे में ३८ जानें चली गईं, ३२ घायल हो गए। इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बाद लोगों के हाथ मदद के लिए नहीं उठे, बल्कि मृतकों की जेबों को साफ किया गया।
अड़ूपुर का मंजर इतना वीभत्स था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए लेकिन यहां लोग मृतकों और घायलों की मदद के बजाए बचते रहे। पुलिस और रेलकर्मी शवों की खोजबीज में जुटे थे। उस दौरान जब पुलिस लोगों से सहयोग की बात करते तो हर कोई किनारा कर लेता। ऐसी स्थिति को देख मानवता शर्मसार हो रही थी। सिर्फ वही लोग मदद को आगे आ रहे थे जिनके रिश्तेदार, परिचित हादसे का शिकार हुए। एसपी रतन कुमार श्रीवास्तव, एएसपी पंकज पांडे ने खुद मृतकों को उठाने की पहल की तब कहीं जाकर लोग आगे बढ़े और शवों को उठाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में मदद की। वहीं इस हादसे में ज्यादातर मृत लोगों के मोबाइल गायब थे। उनकी जेबें भी साफ थीं। कुछ घायल लोगों ने बताया कि जब तक पुलिस और अन्य राहत टीम पहुंचती। कुछ लोगों ने मृतकों, घायलों की जेब से नकदी, सामान तथा मोबाइल उड़ा लिए। सवाल है कि आखिर क्या हो गया इंसानी रिश्तों को? हालात इंसानी मूल्यों में गिरावट की गवाही दे रहे थे और इस सच पर सोचने को मजबूर कर रहे थे कि आदमी का मूल्य उसकी सांसों तक टिकी है। सांस थमते ही आदमी ही आदमी से कतराता क्यों है।

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